रविवार, 23 सितंबर 2018

जन्मदिन मुबारक़

भोपाल
23.09.2018
प्रिय बहन कृति
                       जन्मदिन कि हार्दिक शुभकामनाएँ ,
                                                                            आज दिनांक 23 सितंबर शुक्लपक्ष ,चतुर्दशी को तुम्हारा जन्मोत्स्व है। मैं इस पत्र के माध्यम से तुम्हें जन्मदिन कि शुभकामनाएं दे रहा हूँ। वर्तमान समय में कई लोग फेसबुक ,व्हाट्सप्प आदि पर लिख कर शुभकामनाऍं देते हैं , पर मैं इस में थोड़ा असहज़ हो जाता हूँ। मैं फ़ोन कर के औपचारिकता में भी ज्यादा सहज नहीं हूँ , परन्तु समय के साथ -साथ आवश्यक्तानुसार कभी कभी करना पड़ता है। मैंने आज भी वही करने का प्रयत्न किया ,तुम्हें फ़ोन भी लगाए ,परन्तु इधर -उधर कि बात तो कर लिया लेकिन तुम्हें शुभकामनाएँ नहीं दे सका। इस वजह से मैं पत्र लिख कर तुम्हें बधाई दे रहा हूँ।
 हमारी और तुम्हारी जान-पहचान पिछले तीन वर्ष से है। यूँ कहो तो मुझे नहीं याद है कि एक सहपाठी के रूप में तुमसे सर्वप्रथम कब बात किया , क्या बात किया ,क्यों किया। यदि कुछ याद करने का प्रयत्न करूँ या यह कहूँ कि हमेशा यह याद तो जरूर रहेगा कि तुम मेरी पहचान कि अज्ञानता में मेरे समक्ष अपने बिहार के रहने वाले के प्रति आलोचनात्मक नाराजगी जाहिर की थी। उस दिन से लेकर कुछ दिन या अभी भी कभी कभी मैं तुम्हें कह देता हूँ कृति मैं बिहार से हूँ। लेकिन मुझे यह लगता है कि हम लोग आपस में क्लास में अवश्य किये होंगें। मैंने आठ वर्ष के उम्र से घर अथवा बिहार से बाहर हूँ, मुझे या बिहार के लोग बाहर रहने वाले अपने जीवन में कई मित्रों से या अनजान लोगों से वे सारे बाते सुनते हैं पर मैं तो कभी असहज नहीं होता। मैं तुम्हें विश्वास दिलाता हूँ कि मै उस दिन अथवा अन्य कभी भी मेरे समक्ष बोलोगे तो कभी असहज होऊंगा। उस दिन के बाद एक चीज हुआ वो है कि मैं तुम्हें बहन कह कर सम्बोधित करने लगा और तुम शर्माजी। एक अनुरोध है कि जब मैं तुम से ये कहूँ कि मैं बिहार से हूँ तो तुम कभी असहज मत होना।
खैर छोड़ो इन सारे बातों को याद करने का एक मात्र उद्देश्य यह है कि तुम मेरी सहपाठी हो और मैं तुम्हें बहन से सम्बोधित करता हूँ। यह मर्यादा हमेशा बना रहेगा। बहन पिछले तीन वर्ष में तथा आने वाले वर्ष में मेरे तरफ़ असहजता के लिए क्षमा मांगता हूँ।
इन्सान के अपने यौम--पैदाइश से ज़्यादा अहम दिन उस के लिए और कौन सा हो सकता है। ये दिन बार बार आता है और इन्सान को ख़ुशी और जज़्बात से भर जाता है। हर साल लौट कर आने वाली सालगिरा ज़िंदगी के एहसास को भी शदीद करती है और ज़िंदगी के नए पड़ाव की तरफ़ बढ़ने की ख़ुशी भी देती है
 हमारी मानवतावादी संस्कृति में मनुष्य का वर्तमान जीवन बड़ा अनमोल है क्योंकि संगमयुग में वह सर्वोत्तम पुरुषार्थ करके जन्म -जन्मान्तर के लिए सर्वोत्तम बना है।
मनुष्य चार प्रकार के होते हैं
 पामर - पामर वे हैं जो विषयसक्त हैं। विषयी - विषयी वे हैं जिनका जीवन भोगोन्मुख पर जिनमें कुछ विवेक है। साधक - साधक वे हैं जिनमें सत्वगुण की प्रधनता होती है।
 सिद्ध - सिद्ध वे हैं जो मानव जीवन के परम तथा चरम तत्वज्ञान कर चुके हैं।इनकी प्रत्येक चेष्टा होती है परम आदर्श तथा सहज लोक कल्याणकारिणी
 जन्मदिन खुद में अनमोल होने का अहसास होता है ।यह अहसास ईश्वर का दिया प्रसाद है जो स्वाभविक महसूस किया जाता है।
 एक बार पुनः तुम्हारे जीवन यात्रा मंगलमय हो इसके लिए ईश्वर से प्राथर्ना करता हूँ और जन्मदिन कि शुभकामनाएँ देता हूँ। तुम सहस्त्रायु हो।
तुम्हारा सहपाठी
 त्रिभुवन