सोमवार, 9 जून 2014

मानसिक बीमार

आज -कल कांग्रेस के नेताओं का बयान आ रहा है। कुछ लोग 2014 के लोकसभा चुनाव के दौरान बीजेपी का शब्द ले कर घेर रहें हैं। दिल्ली में पिछले सप्ताह से बिजली तथा पानी का समस्या हो रहा है। कांग्रेस तथा आम आदमी पार्टी के लोग बीजेपी को जिम्मेदार बोल रहे हैं। क्या इसका जिम्मेदार बीजेपी है? पिछले 15 साल से कांग्रेस कि सरकार थी। कुछ दिन आम आदमी पार्टी की सरकार रही है। उन्होंने क्या उपाय किये थे कि आज ये संकट आया है ? इसपर तो कोई बोलने को तैयार नहीं है। खास कर आम आदमी पार्टी वाले जब दिल्ली की गद्दी छोर कर भाग रहे थे उस समय समझ में उनको नहीं आया था। उनके कारण आज दिल्ली में राष्ट्रपति शासन लगा हुआ है। दिल्ली के सरे विकास का काम ठप पड़ गया है। दिल्ली में अराजकता का माहौल बन गया है। आज केंद्र में बीजेपी कि सरकार बनना मात्र 10 दिन हुए है। जब से सरकार बनी है सब कोई बीजेपी कोस रहे हैं। कांग्रेस के लोग  अपने आप से क्यों नहीं पूछते हैं कि 15 साल दिल्ली 10 केंद्र में सरकार रही है। ऐसा क्या किया जो दिल्ली को आने वाले दिन अच्छा रहे। आज बीजेपी 10 दिन में जो फैसले लिए क्या कांग्रेस अपने 10 दिन में लिए थे ? जैसा सुशासन बीजेपी 2004 में छोर कर गई थी क्या वैसा हीं आज है ?
आज कांग्रेस के नेता मतीन अहमद बिजली संकट की वजह बीजेपी सरकार को दे रही है। कितना आरोप सही है ? एक समय के लिए मान भी ले तो उत्तर प्रदेश हरियाणा के लिए कौन है ? दिल्ली कांग्रेस के नेता हैं अरविंदर सिंह लवली। वे भी आज बीजेपी के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। अरविंदर सिंह उस 8 विधायक में से एक हैं जो की 2013 के दिल्ली विधानसभा चुनाव में अपना सीट बचा पाए। आम आदमी पार्टी के साथ मिल कर सरकार बनाने के लिए सब से आगे थे। आज उनको कोई नहीं पूछ रहा है।

कांग्रेस के नेताओं का बयान। 
आम आदमी पार्टी के नेता आशुतोष ने भी बीजेपी पर आरोप लगाया। किस मानसिकता को वे दिखा रहे हैं? उन्होंने ने काफी कुछ बीजेपी पर आरोप लगाया है। जब उनकी पार्टी को सरकार बनाने का मौका मिला तो वे भाग गए। अब दूसरों  पर सिर्फ आरोप लगाते फिर रहे हैं। कभी अपने अंदर भी झाक कर देख लेते। 49 दिन के सरकार में क्या किया इसपर भी कुछ बोल लेते तो अच्छा रहता है। उनके पार्टी के लोग कभी अपने आप को राम और शास्त्री से तुलना कर रहे थे। फिर भागने के लिए माफ़ी मांगे। अब समय आ गया है कि अपने आप में मंथन करें। अब सुचिता  कि राजनीति करें। दूसरे कि आलोचना करने से बचे। एक अच्छे तथा स्वस्थ राजनीति करें। 

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